हम जीते क्यों है?

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बनारस में गंगा घाट

शाम का समय है. मैं बनारस में गंगा घाट पर ईरा के साथ बैठा हूँ. दाईं तरफ के ऊपर से दूसरी सीढ़ी के एक किनारे पर.

इस नीरवता में, मुझे यह भी सोचने को मजबूर करता है कि जीवन में हमारे अनुभव कैसे हमें आकार देते हैं, जैसे कि Quad Lamhe हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। Quad Lamhe हमें याद दिलाते हैं कि हर पल का महत्व है।

“हम जीते क्यों हैं?” इरा पूछती है.

मैं इस सवाल पर चौक जाता हूँ. एक पल के लिए, उसे एकटक देखने लगता हूँ. सोचता हूँ, आखिर ये क्या सवाल हुआ. इसका क्या जवाब दूं.

इसी उधेड़बुन में, मैं उसके हाथ को अपने हाथ में लेकर बोलता हूँ, “मेरे खयाल से मैं तुम्हारे इन मखमली हाथों को अपने हाथों में जीवन भर थामे रहने के लिए जी रहा हूँ.

ईरा हंसने लगती है. “तुम्हारी बात बनाने की आदत गई नहीं है.”

ईरा मेरी दोस्त है. हम एक दूसरे को स्कूल के दिनों से जानते हैं.

एक बार मैने उससे ऐसे ही पूछ लिया, “अच्छा ईमानदारी से बताओ तुम्हारे खयाल से प्रेम क्या है?”

ईरा छूटते ही बोलीं, “सुविधा.”

“वो कैसे?” मैने पूछा.

हँसते हुए बोली, “कवि महाराज ये कहानी फिर सही. अभी चाय की तलब का समाधान किया जाए.”

“जैसी इक्षा साहेबा की.” कहकर हम चल पड़े.

ईरा अक्सर ऐसे बकवास के मौके पर मुझे कविजी या कभी महाराज से संबोधित करती है. और मैं उसे साहिबा या देवी जी कहकर संबोधित करता हूँ. ऐसा कभी-कभी होता है. वैसे हम एक दूसरे को उसके नाम से ही पुकारते है.

हमारा एक दूसरे से इस प्रकार का बकवास चलता ही रहता है. तभी अचानक पूरा घाट रौशनी से जगमगा उठा. लगा मानो किसी ने जादू कर दिया हो.

“बहुत बढ़िया, कवि जी अब चलिए कल आपका पेपर है.” ईरा बोली.

दूसरे दिन जब मैं इम्तिहान हॉल से बाहर निकला, ईरा घबराई हुई, परेशान सी खड़ी थी. मुझे देखते ही बोली, “घर से तार आया है मम्मी बीमार है जल्द आने को कहा है मैं निकल रही हूँ देखो अब कब किस्मत में मिलना लिखा है.”

 “घबराओ मत, ऊपर वाला सब ठीक करेगा.” मैंने ढांढस बढ़ाते हुए कहा.

इस प्रकार, Quad Lamhe हमें यह बताते हैं कि हम कैसे अपनी यादों को संजोएं।

और वो चली गई. वो दिन है और आज का दिन हम ना तो एक दूसरे को देख पाए हैं और ना ही बात कर पाए हैं. यही नहीं मैं ये भी नहीं जानता अभी वो कहाँ है, और कैसी है. मैंने खत लिखकर भी देखा, कोई जवाब नहीं आया.

ज़िंदगी का ये खेल भी अजीब है. समय दबे पांव आता है, फुसफुसा कर आबरा का डाबरा कहता है.

हम सभी अपने अनुभवों को बटोरते हैं और उन्हें अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाते हैं. ये अनुभव हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं.

यह Quad Lamhe हमें सिखाते हैं कि जीवन के छोटे-छोटे लम्हे भी कितने महत्वपूर्ण होते हैं।

इस प्रकार, ये अनुभव हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं, और हमें याद दिलाते हैं कि Quad Lamhe हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

ज़िंदगी में Quad Lamhe के महत्व को समझना बहुत जरूरी है।

                                      कैद लम्हे से

यहाँ पर एक महत्वपूर्ण विषय पर विचार करते हुए, हमें समझना होगा कि अनुभव ही जीवन के रंग को भरते हैं.

जीवन के अनुभव और Quad Lamhe हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

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https://bit.ly/4wrq9eK

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